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Friday 18th of August 2017
Masoumeen

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के ज़माने के राजनीतिक हालात का वर्णन

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम की इमामत वाला जीवन बीस साल का था जिसको हम तीन भागों में बांट सकते हैं।1. पहले दस साल हारून के ज़माने में2. दूसरे पाँच साल अमीन की ख़िलाफ़त के ज़माने में3. ...

शहादते इमाम अली रज़ा अलैहिस्सलाम

जिस दिन इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम शहीद होने वाले थे उस दिन उन्होंने सुबह की नमाज़ नए वस्त्र पहन कर पढ़ी और उसी स्थान पर बैठे रहे मानो उन्हे किसी अप्रिय घटना के होने का आभास हो ...

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम की शहादत

इमाम अली रज़ा अलैहिस्सलाम की बहुत उपाधियां हैं जिनमें सबसे प्रसिद्ध रज़ा है जिसका अर्थ है राज़ी व प्रसन्न रहने वाला। इस उपाधि का बहुत बड़ा कारण यह है कि इमाम महान ईश्वर की ...

इमामे रज़ा अलैहिस्सलाम

हज़रत इमाम रिज़ा अलैहिस्सलाम का जीवन परिचयहज़रत इमाम रिज़ा अलैहिस्सलाम का नाम अली व आपकी मुख्य उपाधि रिज़ा है।माता पिताहज़रत इमाम रिज़ा अलैहिस्सलाम के पिता हज़रत इमाम ...

सूरए आले इमरान की तफसीर

पवित्र क़ुरआन के सूरए आले इमरान में आया है कि अलिफ़ लाम मीम, अल्लाह जिसके अतिरिक्त कोई ईश्वर नहीं है और वह सदैव जीवित है और हर वस्तु उसी की कृपा से स्थापित है। उसने आप पर वह ...

जीवन में प्रगति के लिए इमाम सादिक (अ) की नसीहतें

इमाम सादिक़ (अ) के ज़माने के लोग इमाम (अ) के ज्ञानात्मक और आध्यात्मिक स्थान से भलीभांति परिचित थे इसलिए जब भी उन्हें मुलाक़ात का सौभाग्य प्राप्त होता था तो आपसे नसीहत व ...

इमाम हसन (अ) के दान देने और क्षमा करने की कहानी।

एक दिन इमाम हसन (अ) घोड़े पर सवार कहीं जा रहे थे कि शाम अर्थात मौजूदा सीरिया का रहने वाला एक इंसान रास्ते में मिला। उस आदमी ने इमाम हसन को बुरा भला कहा और गाली देना शुरू कर ...

रमजान का महत्व।

قال رسول الله (صلى الله عليه و آله)لو يعلم العبد ما فى رمضان لود ان يكون رمضان السنةपैगम्बरे इस्लाम (स.) फ़रमाते हैं:अगर ख़ुदा का बंदा जान लेता कि रमजान में है (क्या बरकतें और क्या रहमतें हैं) तो पूरे ...

अली के शियों की विशेषता।

इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं कि अली अलैहिस्सलाम के शिया वह लोग हैं जो अपने भाईयों, बंधुओं को ख़ुद पर प्राथमिकता देते हैं चाहे उन्हें कितनी ही ज़रूरत क्यों न ...

अमीरुल मोमिनीन अली अलैहिस्सलाम का जीवन परिचय

नाम व अलक़ाब (उपाधियाँ)आपका नाम अली व आपके अलक़ाब अमीरुल मोमेनीन, हैदर, कर्रार, कुल्ले ईमान, सिद्दीक़,फ़ारूक़, अत्यादि हैं।माता पिताआपके पिता हज़रतअबुतालिब पुत्र हज़रत ...

इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम की अहादीस

आज मिले अवसर से लाभ उठाओ, कौन जाने "कल" किसका होगा।जिसकी ज़बान सच्ची होगी, उसका चरित्र पवित्र हो जाएगा।विनम्रता यह है कि अन्य लोगों से भेंट के समय उन्हें सलाम करो और बहस से ...

हज़रत फ़ातेमा ज़हरा स. बेहतरीन आदर्श

हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. की फ़ज़ीलत व मरतबे को बयान करना इन्सान के बस में नहीं है। अगर कोई उनके मरतबे को देखना चाहता है तो उसे देखना चाहिए कि ख़ुदा और उसके रसूल की नज़र में आपका ...

हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. की कुछ हदीसें।

हदीस (1) हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. फ़रमाती हैंः "अगर रोज़ेदार, रोज़े की हालत में अपनी ज़बान, अपने कान और आँख और बदन के दूसरे हिस्सों की हिफ़ाज़त न करे तो उसका रोज़ा उसके लिए ...

हज़रत अली (अ.स.) की नज़र में हज़रते ज़हरा

शादी के अगले दिन जब पैगंबर ने अली (अ.स.) से पूछा:ऐ अली तुमने मेरी बेटी जहरा को कैसा पाया? इमाम ने जवाब दिया, फातिमा अल्लाह की इताअत में सबसे अच्छी मददगार ...

हज़रत फ़ातेमा ज़हरा स. बेहतरीन आदर्श

हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. की फ़ज़ीलत व मरतबे को बयान करना इन्सान के बस में नहीं है। अगर कोई उनके मरतबे को देखना चाहता है तो उसे देखना चाहिए कि ख़ुदा और उसके रसूल की नज़र में आपका ...

जो शख्स शहे दी का अज़ादार नही है

क़सीदाजो शख्स शहे दी का अज़ादार नही हैवो जन्नतो कौसर का भी हक़दार नही है।जिसने न किया खाके शिफा पर कभी सजदासच पूछीये वो दीं का वफादार नही है।ये जश्ने विला शाहे शहीदां से है ...

किस नूर की मज्लिस में मिरी जल्वागरी है

किस नूर की मज्लिस में मिरी जल्वागरी हैजिस नूर से पुर-नूर ये नूर-ए-नज़री हैआमद ही में हैरान क़यास-ए-बशरी हैये कौन सी तस्वीर-ए-तजल्ली से भरी हैगो हुस्न का रुत्बा नहीं मज़कूर ...

हज़रत इमाम हसन अस्करी (स) के उपदेश

हज़रत इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम: मैं तुम्हें अल्लाह से डरने, धर्म में नैतिकता, सच्चाई के लिए कोशिश करने, जिसने तुम्हे अमानत सौंपी है चाहे वह भला व्यक्ति हो या बुरा, उसकी ...

दिलासा हुसैन है।

मज़लूम के लिये यूँ दिलासा हुसैन है।कटवाके सर जो जीतने वाला हुसैन है। सूखे गले को काट ना पाई सितम की धारबतला रही हैं आयतें जिन्दा हुसैन है। सज्दे को तूल दे दो हबीबे खुदा ...

सुंदरता।

इमाम हसन अस्करी (अ) फ़रमाते हैं कि चेहरे का सुन्दर होना विदित सुन्दरता है और बुद्धि व अच्छी सोच आंतरिक सुन्दरता है”।