Hindi
Saturday 24th of June 2017
Articles

हज़रत अली अलैहिस्सलाम की शहादत

पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम ने कहा कि हे अली, जिब्राईल ने मुझे तुम्हारे बारे में एक एसी सूचना दी है जो मेरे नेत्रों के लिए प्रकाश और हृदय के लिए आनंद बन ...

शबे कद़र के मुखतसर आमाल

19,21,23 रमज़ानुल मुबारक की रात के आमाल 1) इन रातो मे गुस्ल करना सुन्नते मुअक्केदा है। 2) दो रकत नमाज़ सुबह की तरह पढ़ी जाऐ और हर रकत मे सात मरतबा क़ुलहो वल्लाहो अहद पढ़ी जाऐ और ...

शबे क़द्र का महत्व और उसकी बरकतें।

अबनाः इमाम मोहम्मद बाक़िर फ़रमाते हैंः शबे क़द्र वह रात है जो हर साल रमज़ानु मुबारक की आख़री तारीखों में आती है जिसमें न केवल क़ुरआन नाज़िल हुआ है बल्कि अल्लाह तआला ने इस ...

अमीरूल मोमिनीन हज़रत अली अ. की वसीयत।

बिस्मिल्लाह हिर्रहमानिर्हीमहज़रत अली अ0 की वसीयतजब आप पर इबने मुल्जिम ज़रबत लगा चुका तो आपने इमाम हसन अ0 और इमाम हुसैन अ0 से फ़रमायाः• मैं तुम दोनो को वसीयत करता हूँ कि ...

इमाम अली की ख़ामोशी

आज हम इस विषय पर चर्चा करेंगे कि जब खि़लाफ़त इमाम अ़ली का हक़ था तो क्यु आपने पैग़म्बर के स्वर्गवास के बाद अपने हक़ को अबूबकर, उस्मान या उमर से लेने की कोशिश नहीं की?इस सवाल के ...

हदीसे ग़दीर की सेहत का इक़रार करने वाले उलामा ए अहले सुन्नत

बहुत से ने हदीसे गदीर की सेहत का इक़रार किया है जैसे:1. इब्ने हजरे हैतमीमौसूफ़ कहते हैं: हदीसे ग़दीर सही है और उसमें किसी तरह कोई शक व शुब्हा नही है, एक जमाअत जैसे तिरमिज़ी, ...

इमाम हसन अ.ह की महानता रसूले इस्लाम स.अ की ज़बानी।

अबनाः हदीसों की किताबों में इब्ने अब्बास के हवाले से बयान हुआ है कि रसूले इस्लाम स.अ. इमाम हसन अलैहिस्सलाम को अपने कांधे पर सवार किए हुए कहीं ले जा रहे थे किसी ने कहा अरे बेटा ...

ख़दीजा ए कुबरा (अ)

नसबहज़रत ख़दीजा (अ) बिन्ते ख़ुवैलद, बिन असद, बिन अब्दुल उज़्ज़ा बिन कलाब, बिन मर्रा, बिन कअब, बिन लोएज, बिन ग़ालिब, बिन फ़हर। आपके वालिदे मोहतरम (ख़ुवैलद) ने जबरदस्त बहादुरी के ...

रोज़े के अहकाम

(शरियते इस्लाम में) रोज़े से मुराद है यह है कि इँसान ख़ुदावन्दे आलम की रज़ा के लिए अज़ाने सुबह से मग़रिब तक उन नौ चीज़ों से परहेज़ करे जिन का ज़िक्र बाद में किया ...

दुआ ऐ सहर

ऐ गमो अन्दोह मे मेरी पनाहगाह    या मफज़ई इन्दा कुरबती    يَا مَفْزَعِي عِنْدَ كُرْبَتِيऐ मुश्किलो मे मेरी मदद करने वाले    या ग़ौसी इन्दा शिद्दती    وَ يَا غَوْثِي عِنْدَ ...

वह चीज़े जो रोज़े को बातिल करती है

1581. चन्द चीज़ें रोज़े को बातिल कर देती हैः-1. खाना और पीना।2. जिमाअ करना।3. इस्तेम्ना- यानी इंसान अपने साथ या किसी दूसरे के साथ जिमाअ के अलावा ऐसा फ़ेल करे जिसके नतीजे में मनी ...

जिन पर रोज़ा रखना वाजिब नही

(1734) जो शख्स बुढ़ापे की वजह से रोज़ा न रख सकता हो या रोज़ा रखना उस के लिए शदीद तकलीफ़ का बाइस हो तो उस पर रोज़ा वाजिब नहीं है। लेकिन रोज़ा न रखने की सूरत में ज़रूरी है कि हर रोज़े ...

मुसाफ़िर के रोज़ों के अहकाम

(1723) जिस मुसाफ़िर के लिए सफ़र में चार रकअती नमाज़ के बजाये दो रकअती पढ़ना ज़रूरी है उसे रोज़ा नही रखना चाहिये लेकिन वह मुसाफ़िर जो पूरी नमाज़ पढ़ता हो, मसलन जिस का पेशा ही ...

ईरान की इस्लामी क्रांति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी र. की बरसी।

यह वह दिन है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह इस नश्वर संसार से चले गये। एक ऐसी हस्ती जिसने ईरान के इतिहास पर गहरा व निर्णायक असर डाला और ...

उम्मुल मोमिनीन हज़रत ख़दीजा (स)

अबनाः दस रमजानुल मुबारक उम्मुल मोमिनीन हज़रत ख़दीजा सलामुल्लाह अलैहा के निधन का दिन है। उन्होंने दुनिया को जन्नत में औरतों की सरदार हजरत फातिमा (स) जैसी बेटी का उपहार दिया ...

दुआए तवस्सुल

हिमायत / शिफ़ा'अत मांगनाशेख़ अबू जाफर  तुसी अपनी किताब मिस्बाह में फरमाते हैं  की इमाम हसन-बिन-अल-अस्करी (अ:स) ने यह दुआ अबू मुहम्मद के आग्रह पर उस समय लिखी जब उन्हों ने ...

हदीसे किसा

बिसमिल्ला हिर रहमानिर रहीमअन फ़ा'तिमा'तज़ ज़हरा ( अलय्हस-सलाम ) बिनती रसूलिल-लाही सल-लाल-लाहो अलैहे वसल्लम क़ालत : दख़'अला अलैय-या अबी रसूलुल-लाही ( स' ) फ़ी बा'-ज़िल अय-यामी ...

दुआए अहद

इमाम जाफर अल-सादिक़ (अ:स) से नकल हुआ है की जो शख्स चालीस रोज़ तक हर सुबह इस दुआए अहद तो पढ़े तो वोह इमाम (अ:त:फ) के मददगारों में से होगा और अगर वो इमाम (अ:स) के ज़हूर के पहले मर जाता है ...

दुआ फरज

अल्ला हुम्मा कुन ले-वली'य्येकल हुज्जत' इब्निल हसने सलावातोका अ'लय्हे व अ'ला आ'बा-एही फ़ी हाज़े'हिस सा-अ'ते व फ़ी कुल्ले सा-अ'तिन व'लिय्यावं व हाफ़े'जो व क़ा'एदौं व नासे'रों व ...

रमज़ान को रमज़ान क्यों कहा जाता है?

अबनाः रसूले इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम ने फ़रमायाः रमजान गुनाहों को जला देने वाला महीना है अल्लाह तआला इस महीने में अपने बंदों के गुनाहों को जला देता है और ...