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Friday 18th of August 2017
Articles

सूराऐ युनुस की तफसीर

सूरए यूनुस, क़ुराने करीम का दसवां सूरा है जो पैग़म्बरे इस्लाम (स) के पैग़म्बर बनने के शुरूआती दिनों में नाज़िल अर्थात अवतरित हुआ था। इस सूरे में 109 आयते हैं।यूनुस एक ईश्वरीय ...

सूराऐ इब्राहीम की तफसीर

पवित्र क़ुरआन के चौदहवें सूरे का नाम इब्राहीम है जिसमें 52 आयतें हैं। इस सूरे की 28वीं और 29वीं आयतें को छोड़कर इसकी सभी आयतें मक्के में उतरी हैं। इसका कारण यह है कि इस सूरे में ...

शहीद मोहसिन हुजजी की अपने 2 वर्षीय बेटे अली के नाम वसीयत।

"सलाम अली आग़ा ! बाबा की जान सलाम, सलाम मेरे बेटे, मै तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ: अली जान ! मेरा बहुत दिल चाहता है कि इस राह में सुर्ख़रू (कामयाब) हो जाऊँ, इस राह मे शहीद हो जाऊँ। मेरा ...

माहे ज़ीक़ाद के इतवार के दिन की नमाज़

ये महीना हुरमत वाले महीनो के शूरू होने का महीना है कि जिनका ज़िक्र परवरदिगार ने क़ुरआने करीम मे किया है।सैय्यद इब्ने ताऊस एक रिवायत नक़्ल करते है कि ज़ीक़ाद का महीना सख्त ...

इमाम रज़ा अ.स. ने मामून की वली अहदी क्युं क़ुबूल की?

अकसर लोगों के दरमियान सवाल उठता है कि अगर अब्बासी खि़लाफ़त एक ग़ासिब हुकूमत थी तो आखि़र हमारे आठवें इमाम ने इस हुकूमत में मामून रशीद ख़लिफ़ा की वली अहदी या या उत्तरधिकारिता ...

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम का ज्ञान

मामून जो कि इमाम की तरफ़ लोगो की बढ़ती हुई मोहब्बत और लोगों के बीच आपके सम्मान को देख रहा था और आपके इस सम्मान को कम करने और लोगों के प्रेम में ख़लल डालने के लिए उसने बहुत से ...

सूरा निसा की तफसीर

पवित्र क़ुरआन के एक सूरे का नाम निसा है जिसका अर्थ होता है महिलाएं। इस सूरे के इस नामंकन का एक कारण यह है कि इसमें महिलाओं के अधिकारों और उनसे संबंधित मामलों का उल्लेख किया ...

सूर –ए- माएदा की तफसीर 2

सूरे माएदा की आयत संख्या 27 से 31 धरती पर पहले मनुष्य व पहले ईश्वरीय दूत हज़रत आदम और उनके दो बेटों में से एक के दूसरे के हाथों क़त्ल किए जाने की घटना की ओर संकेत करती है। आयत ...

हज़रत यूसुफ़ और ज़ुलैख़ा के इश्क़ की कहानी क़ुरआन की ज़बानी

हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम के भाई उन्हें कुएं में डालने के बाद रोते हुए अपने पिता के पास आए। उन्होंने पिता के समक्ष यह सिद्ध करने के लिए यूसुफ़ को भेड़िया खा गया है, उनके शरीर ...

सूरए हिज्र की तफसीर 1

क़ुराने मजीद के 15वें सूरे ‘हिज्र’ है। इस सूरे में 99 आयतें हैं। यह हिजरत से पूर्व मक्के में नाज़िल हुआ था।इस सूरे का नाम आयत क्रमाक 80 में असहाबे हिज्र अर्थात हज़रत सालेह ...

सूर –ए- तौबा की तफसीर

पवित्र क़ुरआन के व्याख्याकारों के अनुसार सूरए तौबा का आरंभ बिस्मिल्लाह से न होकर वचन तोड़ने वाले शत्रुओं से विरक्तता से होना, इस गुट के प्रति ईश्वर के प्रकोप और क्रोध को ...

सूरे रअद की तफसीर

पवित्र क़ुरआन के जो सूरे मक्के में नाज़िल हुए उन्हें मक्की कहा जाता है और जो सूरे मदीने में उतरे उन्हें मदनी कहा जाता है। जो सूरे मक्के में नाज़िल हुए है उनमें आम तौर पर ...

सूर –ए- आराफ़ का संक्षिप्त परिचय

पहली आयतों में फ़रिश्तों की सहायता की ओर संकेत किया गया है: उस समय को याद करो जब दुश्मनों की अधिक संख्या और उनके अधिक सैन्य बल से तम बहुत भयभीत थे और तुमने अल्लाह से सहायता ...

इमाम रज़ा अ.स. ने मामून की वली अहदी क्युं क़ुबूल की?

अकसर लोगों के दरमियान सवाल उठता है कि अगर अब्बासी खि़लाफ़त एक ग़ासिब हुकूमत थी तो आखि़र हमारे आठवें इमाम ने इस हुकूमत में मामून रशीद ख़लिफ़ा की वली अहदी या या उत्तरधिकारिता ...

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम का जन्मदिवस

आज इमाम अली इब्ने मूसर्रज़ा अलैहिस्सलाम का शुभ जन्म दिवस है। वह इमाम जो प्रकाशमई सूर्य की भांति अपना प्रकाश बिखेरता है। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लाहो अलैहे वआलेही वसल्लम का ...

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम का ज्ञान

मामून जो कि इमाम की तरफ़ लोगो की बढ़ती हुई मोहब्बत और लोगों के बीच आपके सम्मान को देख रहा था और आपके इस सम्मान को कम करने और लोगों के प्रेम में ख़लल डालने के लिए उसने बहुत से ...

इमामे रज़ा अलैहिस्सलाम

हज़रत इमाम रिज़ा अलैहिस्सलाम का जीवन परिचयहज़रत इमाम रिज़ा अलैहिस्सलाम का नाम अली व आपकी मुख्य उपाधि रिज़ा है।माता पिताहज़रत इमाम रिज़ा अलैहिस्सलाम के पिता हज़रत इमाम ...

सूर - ए - बक़रा की तफसीर 3

पवित्र क़ुरआन का सबसे बड़ा सूरा सूरए बक़रह है जिसमें 286 आयते हैं। इस सूरे के उतरने से नवस्थापित इस्लामी समाज से संबंधित ज़रूरी मामले स्पष्ट हुए और मुसलमानों को ज्ञात हुआ कि ...

इल्मे तजवीद और उसकी अहमियत

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीमतजवीद के मअना बेहतर और ख़ूबसूरत बनाना है। तजवीद उस इल्म का नाम है जिससे क़ुरआने मजीद के अलफ़ाज़ व हुरूफ़ की बेहतर से बेहतर अदाएगी और आयात व ...

मासूमाऐ क़ुम जनाबे फातेमा बिन्ते इमाम काज़िम (अ.स.)

 इमाम जाफ़रे सादिक़ (अ.स.) की पेशीन गोईसादिक़े आले मोहम्मद हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक़ (अ.स.) इरशाद फ़रमाते हैं कि अल्लाह की वजह से मक्का ए मोअज़्ज़मा हरम , रसूल अल्लाह (स.अ.) की वजह से ...