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Wednesday 24th of May 2017
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नमाज़



करीब होने का ख़ालिक़ से रास्ता है नमाज़,
फ़ुरुए दीन की जिससे है इब्तेदा है नमाज़,
ख़ुदा की जिसमें है तस्वीर आईना है नमाज़,
जो काम आयेगी महशर में वो दुआ है नमाज़।।

फ़ज़ीलतों पे फ़ज़ीलत नसीब होती है,
नमाज़ पढ़ने से इज़्ज़त नसीब होती है।।

 

जो चाहते हो के ख़ालिक़ से हमकलाम रहो,
तो फिर नमाज़ के पाबन्द सुबहो शाम रहो,
अमल की राह में तुम पैरू ए इमाम रहो,
रहो जहाँ में जहाँ भी ब एहतेशाम रहो।।

जो कामयाबी का ज़ीना है उसपे चढ़ते रहो,
सदा ए रब्बे जहाँ है नमाज़ पढ़ते रहो।।

 

नमाज़ ज़रिया है ख़ालिक़ से दोस्ती के लिये,
नमाज़ ज़रिया है ईमाँ की बरतरी के लिये,
नमाज़ ज़रिया है मरक़द में रौशनी के लिये,
नमाज़ ज़रिया है मेराज ए बन्दगी के लिये।।

नमाज़ इश्क़ ए इलाही की लौ बढ़ाती है,
नमाज़ क़ब्र की मुश्किल में काम आती है।।

 

हुऐ हैं जितने नबी और वसी नमाज़ी थे,
रसूले हक़ थे नमाज़ी अली नमाज़ी थे,
हसन हुसैन, तक़ी ओ नक़ी नमाज़ी थे,
ख़ुदा से इश्क़ था जिनको सभी नमाज़ी थे।।

उसूले हक़ के मुताबिक नमाज़ पढ़ते हैं,
ख़ुदा के इश्क़ में आशिक़ नमाज़ पढ़ते हैं।।

 

जो चाहो रब से करें गुफ़्तुगू नमाज़ पढ़ो,
न हो जो पूरी कोई आरज़ू नमाज़ पढ़ो,
कमाल पायेगी हर जुस्तुजू नमाज़ पढ़ो,
रहोगे हश्र में तुम सुर्खरू नमाज़ पढ़ो।।

ख़ुलूसे दिल से जो सजदे में सर ये ख़म हो जाये,
तो बन्दा रब की निगाहों में मोहतरम हो जाये।।

 

इसी से दुनिया में इज़्ज़त नसीब होती है,
इसी से रिज़्क़ में बरकत नसीब होती है,
इसी से चेहरे को ज़ीनत नसीब होती है,
इसी से रब की मुहब्बत नसीब होती है।।

ज़मीं पे आके फ़लक से ये काम करते हैं,
नमाज़ियों को फ़रिश्ते सलाम करते हैं।।

 

करो हुसैन का मातम मगर नमाज़ के साथ,
बिछाओ घर में सफ़े ग़म मगर नमाज़ के साथ,
उठाओ गाज़ी का परचम मगर नमाज़ के साथ,
मनाओ माहे मुहर्रम मगर नमाज़ के साथ।।

हुसैनियत का ये पैग़ाम करना है जारी,
जो बेनमाज़ी है उसकी नहीं अज़ादारी।।

 

थे चूर ज़ख़्मो से सरवर क़ज़ा नमाज़ न थी,
ज़बाँ थी प्यास से बाहर क़ज़ा नमाज़ न थी,
था दिल पे दाग़े बहत्तर क़ज़ा नमाज़ न थी,
गले पा शिम्र का खंजर क़ज़ा नमाज़ न थी।।

पढ़ो नमाज़ हुसैनी मिज़ाज हो जाओ,
सितम के वास्ते एक एहतेजाज हो जाओ।।

 

अमल से जो है मुसलमाँ नमाज़ पढ़ता है,
है जिसमें तक़वा ओ ईमाँ नमाज़ पढ़ता है,
समझ के पढ़ले जो क़ुरआँ नमाज़ पढ़ता है,
ख़ुदा के इश्क़ में इंसाँ नमाज़ पढ़ता है।।

जिहादे नफ़्स जो करता है ग़ाज़ी है "सलमान",
ख़ुदा का शुक्र अदा कर नमाज़ी है "सलमान"।।

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