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Thursday 23rd of February 2017
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अहलेबैत (अ) से मुहब्बत मुसलमानों के बीच एकता की धुरी बन सकती है।

अहलेबैत न्यूज़ एजेंसी अबना: आयतुल्लाह अराकी ने इस्लामी समाज की संयुक्त पहचान बनने की ज़रूरत की ओर इशारा करते हुए कहा: अगर हम इस्लामी समाज की अपनी विशेष पहचान बना सकें तो हमें वैचारिक मतभेद से घबराना नहीं होगा क्योंकि सैद्धांतिक मतभेद समाज के विकास और तरक्की का कारण बनते हैं।
''इमाम खुमैनी और सुप्रीम लीडर के विचारों में इस्लामी सम्प्रदाय के शीर्षक से आयोजित अराक में पहले राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए आयतुल्लाह मोहसिन अराकी ने कहा: खतरा इस बात का है कि अपनी पहचान बनाने में, समाज मतभेद का शिकार हो जाए और अगर एक समाज की केंद्रीय धुरी को सदमा पहुंचे तो वह समाज बिखर जाएगा, सफल समाज वह है जिस में एक संयुक्त विचार प्रणाली पाई जाए।
उन्होंने कहा यदि हम चाहें कि इस्लामी समाज की एक पहचान हो तो हमें इमाम अली अलैहिस्सलाम की शिक्षाओं की तरफ़ देखना होगा, कि आपने कहा कि हिदायत के रास्ते में अपने साथियों की कमी से डरना नहीं कभी कभी लोग अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं के आधार पर भी बिखर जाते हैं, वह बात जो समाज को एकजुट करती है इरादों, चाहतों और रुझान में एकजुटता है।
आयतुल्लाह अराकी ने साझा विशेषताओं की ओर इशारा करते हुए कहा: वह समाज जिसकी इच्छाऐं एक हों उसकी पहचान भी एक होगी चाहे सकारात्मक हो या नकारात्मक, लेकिन हम जब इस्लामी समाज की बात करते हैं तो इसका मतलब एकेश्वरवादी समाज है।
उन्होंने कहा: मुहम्मद व आले मोहम्मद स.अ. से दोस्ती और उनके दुश्मनों से दुश्मनी इस्लामी समाज को एकेश्वरवादी बनाती है। रसूले अकरम (स.) ने अपने इनाम को अहलेबैत (अ) की मुहब्बत बताया हमारा मीडिया इस राह पर अग्रसर हो कि अहलेबैत (अ) से इश्क़ को समाज में मजबूत करें ताकि हमारे बच्चे इस इश्क़ के साथ परवान चढ़ें, ऐसा समाज एकमात्र इरादे वाला होगा।
आयतुल्लाह मोहसिन अराकी ने अहलेबैत (अ) की मुहब्बत को समाज में एकता ईजाद करने वाला कारक बताते हुए कहा: यह प्यार हमारे और सभी इस्लामी देशों के बीच एक संयुक्त कारक है यह मुहब्बत ही विशेष पहचान को अस्तित्व में लाती है चरमपंथी टोलों ने इस संयुक्त कारक को टार्गेट बनाया है और इसे दूर करने की कोशिश की है।
उन्होंने कहा: यह मोहम्मदी पहचान हम मुसलमानों को एक ही दिशा की ओर ले जाती है।
उल्लेखनीय है कि अराक विश्वविद्यालय, विश्व अहलेबैत (अ) परिषद और अन्य सांस्कृतिक संस्थाओं के सहयोग से इमाम खुमैनी और इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर के विचारों में इस्लामी सम्प्रदाय के शीर्षक के अंतर्गत पहले राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया है जिसमें महान विदेशी हस्तियों के अलावा बुज़ुर्ग सुन्नी उल्मा ने भी भाग लिया है।

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