Hindi
Wednesday 29th of March 2017
code: 80701
नौहा



तुरबते बेशीर पर कहती थी माँ असग़र उठो
कब तलक तन्हाई में सोओगे ऐ दिलबर उठो


है अंधेरा घर में नज़रों में जहाँ तारीक है
कब तलक पिन्हाँ रहोगे ए महे अनवर उठो


हम सबों को कै़द करके अशक़िया ले जाऐगें
किस तरह तन्हा तुम्हें छोड़ेगी यह मादर उठो


गोद खाली देखकर पूछे अगर सुग़रा तुम्हें
क्या कहे इस नातवाँ से मादरे मुज़तर उठो


गोद से मेरी जुदा होते न थे तुम तो कभी
नींद इस सुनसान बन में आ गयी क्योंकर उठो


किसलिए नाराज़ हो आओ मना लूँ मैं तुम्हें
कुछ जुबां से तो कहो सदके़ गयी मादर उठो


दूध दो दिन से न पाया इसलिए रूठे हो क्या
बेकसो मजबबूर है माँ है एै मेरे दिलबर उठो


किस तरह तन्हा अंधेरी रात में नींद आएगी
आओ सीने से लगा लें माँ अली असग़र उठो


हो गई है ज़िन्दगी दुश्वार अब अफकार से
'फिक्र' रौज़े पर चलो बस या अली कहकर उठो

user comment
 

latest article

  हज़रत फ़ातेमा ज़हरा स. बेहतरीन आदर्श
  हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. की कुछ हदीसें।
  हज़रत अली (अ.स.) की नज़र में हज़रते ज़हरा
  हज़रत फ़ातेमा ज़हरा स. बेहतरीन आदर्श
  जो शख्स शहे दी का अज़ादार नही है
  किस नूर की मज्लिस में मिरी जल्वागरी है
  हज़रत इमाम हसन अस्करी (स) के उपदेश
  दिलासा हुसैन है।
  सुंदरता।
  पैग़म्बर स.अ. की भविष्यवाणी।